Product Description
यह पुस्तक "मिलिंद प्रश्न" (पाली: मिलिन्दपञ्ह) का हिंदी अनुवाद है। यह बौद्ध धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन ग्रंथ है।
इस पुस्तक की मुख्य विशेषताएं:
विषय-वस्तु: यह ग्रंथ इंडो-ग्रीक राजा मेनेंडर प्रथम (जिन्हें बौद्ध साहित्य में मिलिंद कहा गया है) और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच हुए दार्शनिक संवादों का संग्रह है।
शैली: यह प्रश्न-उत्तर (संवाद) शैली में लिखा गया है। राजा मिलिंद, जो अत्यंत बुद्धिमान और तार्किक थे, बौद्ध दर्शन से संबंधित कठिन और गूढ़ प्रश्न पूछते हैं, और भिक्षु नागसेन उन्हें बड़ी सरलता और तर्कपूर्ण तरीके से समझाते हैं।
प्रमुख विषय: इसमें बौद्ध धर्म के मूलभूत सिद्धांतों जैसे—अनात्मवाद (आत्मा का अस्तित्व न होना), पुनर्जन्म, कर्म-फल, निर्वाण, और नैतिकता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
अनुवाद और संपादन: आपके द्वारा साझा की गई छवि के अनुसार, इस संस्करण का हिंदी अनुवाद भिक्षु जगदीश कश्यप द्वारा किया गया है और इसे आचार्य सूर्यकान्त भगत तथा डॉ. राजेन्द्र भरमे द्वारा संपादित किया गया है।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संदर्भ
पुस्तक के कवर पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का एक प्रसिद्ध उद्धरण अंकित है, जो इस ग्रंथ के महत्व को रेखांकित करता है:
"इस पुस्तक को शिक्षकों और विद्यार्थियों को अवश्य पढ़ना चाहिए ऐसी मेरी इच्छा है। शिक्षकों में और विद्यार्थियों में कौनसे गुण होना चाहिए यह इसमें बताया है।"
Extensive collection of books covering fiction, non-fiction, academic, self-help, and children's literature
Printed on high-quality paper with clear typography for a comfortable and enjoyable reading experience
Strong and durable binding designed to withstand regular reading and long-term use
Carefully curated titles from bestselling authors, classic writers, and emerging voices
Ideal for students, professionals, and passionate readers across all age groups
Encourages learning, imagination, and personal growth through diverse topics and stories
Perfect for personal collections, educational purposes, libraries, and thoughtful gifting